अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 से चल रहा सशस्त्र संघर्ष अब केवल मिसाइल हमलों और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही, तेल की आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा इस युद्ध का सबसे अहम मोर्चा बन चुके हैं। ईरान जलमार्ग पर दबाव बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर असर डालना चाहता है, जबकि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और प्रतिबंधों के जरिये समुद्री रास्ते खुले रखने की कोशिश कर रहा है।
18 सितंबर को ईरान ने दावा किया कि उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हॉर्मुज़ में टोगो के झंडे वाले तेल टैंकर Trend को निशाना बनाया। इस दावे की तत्काल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे ईरान के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है। फिर भी, यह घटनाक्रम दिखाता है कि समुद्री रास्ते अब दोनों पक्षों के दबाव और जवाबी कार्रवाई का सीधा मैदान बन गए हैं।
संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों से हुई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड इस अभियान को Operation Epic Fury कहता है। इसके बाद ईरान ने अमेरिकी ठिकानों, क्षेत्रीय सहयोगियों और समुद्री आवाजाही से जुड़े लक्ष्यों पर कार्रवाई की कोशिश की, जबकि अमेरिका ने ईरान के सैन्य, नौसैनिक और ऊर्जा ढांचे पर हमले किए। दोनों पक्ष सैन्य नुकसान और हमलों को लेकर अलग-अलग दावे करते रहे हैं, जिनमें से सभी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक समझौता या युद्धविराम व्यवस्था बनी थी, लेकिन वह स्थायी शांति में नहीं बदल सकी। बाद में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन के आरोप लगाए और लड़ाई फिर तेज हुई। इस विफल प्रयास ने साफ कर दिया कि केवल अस्थायी सैन्य विराम से परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, क्षेत्रीय सहयोगी समूहों और प्रतिबंधों से जुड़े मूल विवाद खत्म नहीं होने वाले।
अमेरिका ने सैन्य दबाव के साथ आर्थिक कार्रवाई भी बढ़ाई है। सितंबर में ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़े 36 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए। इसके बाद ईरान समर्थित मिलिशिया और वित्तीय नेटवर्कों को भी निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, हॉर्मुज़ या लाल सागर में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों, जहाजों के बीमा खर्च और दुनिया भर की आपूर्ति-श्रृंखला पर असर पड़ रहा है। यमन में हूती समूह की गतिविधियां इस संकट को और बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने का खतरा बढ़ाती हैं।
कूटनीति के स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 सितंबर को ईरानी अधिकारियों से सीधे संपर्क और युद्ध के संभवतः समाप्ति की ओर बढ़ने की बात कही। ईरान ने प्रत्यक्ष बातचीत की पुष्टि नहीं की है और कोई नया औपचारिक समझौता भी घोषित नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल बातचीत को शुरू हो चुकी शांति प्रक्रिया नहीं, बल्कि तनाव के बीच उभरा एक सीमित राजनीतिक संकेत ही माना जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र तथ्य-जांच मिशन ने दो अमेरिकी हमलों के मामले में संभावित युद्ध अपराधों के लिए ‘उचित आधार’ मिलने की बात कही है। उसी मिशन ने ईरानी अधिकारियों की कुछ कार्रवाइयों, खासकर विरोध प्रदर्शनों के दमन, को मानवता के खिलाफ अपराधों से जोड़ा है। ये निष्कर्ष गंभीर हैं, लेकिन अंतिम अदालत का फैसला नहीं हैं; दोनों पक्षों के कानूनी और राजनीतिक दावे अब भी विवादित हैं।
अभी इस युद्ध का सबसे बड़ा सवाल यह है कि हॉर्मुज़ में तनाव को सीमित रखा जा सकता है या नहीं। समुद्री मार्ग में किसी बड़े हमले की पक्की पुष्टि, परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी और दोनों पक्षों के बीच लागू होने वाला भरोसेमंद युद्धविराम—आगे की स्थिति इन्हीं तीन मोर्चों पर निर्भर करेगी। फिलहाल सैन्य टकराव जारी है, जबकि कूटनीतिक रास्ता खुलने के संकेत मौजूद तो हैं, पर ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।