LIVEसत्ता से सवाल, जनता की आवाज़
राजनीतिक सपेरा
LIVEराजनीतिक शतरंज

इजरायल चुनाव में कांटे की टक्कर, नेतन्याहू और आइसेनकोट के खेमे बराबरी पर

इजरायल के नए आम चुनाव में किसी भी ब्लॉक को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। शुरुआती एग्जिट पोल के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गॉडी आइसेनकोट का कैंप बराबरी की टक्कर में है।

Live coverage active — नई जानकारी आते ही अपडेट किया जाता है।

राजनीतिक सपेरा

Latest Updates

6 प्रकाशित अपडेट्स
समझिए

आइसेनकोट खेमा संसद अध्यक्ष बदलने की तैयारी में

आइसेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी खेमा नई सरकार बनने से पहले ही नेसेट के अध्यक्ष को बदलने पर विचार कर रहा है। टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, विपक्षी दल मौजूदा अध्यक्ष ओहाना की जगह याइर लापिड को लाने पर चर्चा कर रहे हैं। इससे विपक्ष को संसद की कार्यसूची पर नियंत्रण मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलताओं की जांच के लिए राज्य आयोग बनाने और सरकार के न्यायिक बदलाव से जुड़े कानूनों को पलटने की कोशिश हो सकती है। यह पहल गठबंधन वार्ताओं से अलग संसदीय शक्ति-परीक्षण होगी।

UPDATE

यूटीजे आइसेनकोट की अल्पमत सरकार को बाहर से समर्थन पर विचार कर रही

अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यूनाइटेड टोरा जूडिज्म पार्टी के कुछ नेता गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाली अल्पमत सरकार को बाहर से समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इजरायल ने चैनल 12 के हवाले से बताया कि यूटीजे गठबंधन में शामिल हुए बिना कुछ वोटों पर अनुपस्थित रह सकती है, ताकि सरकार गिरने से बचे। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी नेतन्याहू से सैन्य सेवा छूट संबंधी कानून न मिलने से नाराज है। हालांकि, सैन्य भर्ती कानून पर आइसेनकोट का रुख दोनों पक्षों के बीच बड़ी अड़चन बना हुआ है।

बयान

लिबरमैन ने अरब दलों वाली सरकार से फिर किया इनकार

यिस्राएल बेइतिनु पार्टी के नेता एविगडोर लिबरमैन ने कहा है कि उनकी पार्टी अगली गठबंधन सरकार में अरब नेतृत्व वाले दलों के साथ शामिल नहीं होगी। टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, लिबरमैन ने सोशल मीडिया पोस्ट में राअम और जॉइंट लिस्ट को लेकर कड़ा रुख दोहराया। यह रुख आइसेनकोट के लिए सरकार बनाने की राह मुश्किल करता है, क्योंकि दोनों प्रमुख खेमे बहुमत से दूर हैं और अरब दलों के समर्थन या सहयोग के बिना विकल्प सीमित हैं।

UPDATE

चुनावी दखल जांच में मोसाद भी शामिल होने की खबर

इजरायल के चुनाव में कथित विदेशी दखल की जांच अब सिर्फ शिन बेट तक सीमित नहीं रहने की खबर है। टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, चैनल 12 की रिपोर्ट में कहा गया है कि मोसाद भी जांच में शामिल हो रहा है। जांच का फोकस कतर के साथ तुर्किये से संभावित प्रभाव अभियान पर भी बताया गया है। आरोपों के मुताबिक, अरब मतदाताओं की मतदान हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए धन दिए जाने की जांच हो रही है। केंद्रीय चुनाव समिति ने कहा है कि जांच सीमित है और चुनाव नतीजे प्रभावित नहीं होंगे।

UPDATE

राअम कार्यकर्ताओं को रिश्वत के सबूत न मिलने पर रिहाई की खबर

चुनाव के दिन हिरासत में लिए गए राअम पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत या नजरबंदी से जल्द रिहा किए जाने की खबर है। टाइम्स ऑफ इजरायल ने हारेत्ज के हवाले से बताया कि मतदाताओं को रिश्वत देने की कोशिश का सबूत नहीं मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने नकदी वाले लिफाफे जब्त किए थे, लेकिन उनका किसी कथित वोट-खरीद योजना से संबंध नहीं मिला। पुलिस ने इस मामले को विदेशी दखल की अलग जांच से असंबंधित बताया है।

UPDATE

इजरायल चुनाव के फाइनल नतीजे घोषित, किसी भी खेमे को बहुमत नहीं

इजरायल के आम चुनाव के अंतिम परिणाम सामने आ गए हैं, जिसमें किसी भी राजनीतिक खेमे को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। दोनों प्रमुख धड़े बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गए हैं, जिससे देश में राजनीतिक गतिरोध और अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। नतीजों के बाद संसद में बहुमत साबित करने के लिए अब जटिल और कठिन राजनीतिक वार्ताओं का दौर शुरू होने की उम्मीद है।

ORIGINAL ARTICLE

मूल खबर

Live Updates के पीछे की पूरी खबर और ज़रूरी संदर्भ।

इजरायल चुनाव में कांटे की टक्कर, नेतन्याहू और आइसेनकोट के खेमे बराबरी पर

इजरायल में हुए नए आम चुनाव के शुरुआती एग्जिट पोल ने राजनीतिक तस्वीर साफ कर दी है, जहां मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिखाई दे रहा है। विभिन्न प्रमुख नेटवर्क के एग्जिट पोल के मुताबिक, विपक्षी नेता गॉडी आइसेनकोट का ब्लॉक और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कैंप लगभग 50 से 52 सीटों के बीच कांटे की टक्कर में फंसे हुए हैं।

इजरायल की संसद केनेसैट में सरकार बनाने और बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। वर्तमान एग्जिट पोल के नतीजे दोनों मुख्य खेमों को इस जादुई आंकड़े से दूर रख रहे हैं, जिससे साफ है कि चुनाव के बाद एक बार फिर जोड़-तोड़ और गठबंधन की राजनीति का दौर तय माना जा रहा है।

यह चुनाव इजरायल के इतिहास के सबसे बड़े सुरक्षा संकट और 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमलों के बाद पहली बार आयोजित किए गए हैं। इन हमलों के बाद से गाजा, लेबनान और ईरान के मोर्चों पर लगातार युद्ध की स्थिति बनी हुई है, जिसने देश की आंतरिक राजनीति को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया और मतदान प्रतिशत 77.7% तक पहुंच गया। पिछले दो दशकों में यह सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया है, जो यह बताता है कि युद्ध और सुरक्षा संकट के इस दौर में आम जनता देश की दिशा तय करने में कितनी सक्रिय रूप से शामिल हुई है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पिछले तीन दशकों में से लगभग 19 साल तक सत्ता की कमान संभाल चुके हैं और वर्तमान में वह भ्रष्टाचार के मामलों का भी सामना कर रहे हैं। उनके नेतृत्व वाला लिकुड खेमा और उनके दक्षिणपंथी सहयोगी देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के नाम पर वोट मांग रहे हैं, जबकि अमेरिकी समर्थन को भी वे अपनी ताकत बता रहे हैं।

दूसरी ओर, विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गॉडी आइसेनकोट का 'परिवर्तन ब्लॉक' नेतन्याहू सरकार की नीतियों और 7 अक्टूबर की सुरक्षा चूक को बड़ा मुद्दा बना रहा है। आइसेनकोट ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा कि एग्जिट पोल के नतीजे नेतन्याहू और उनकी सरकार में जनता के पूर्ण अविश्वास को साफ तौर पर दर्शाते हैं।

इजरायली राजनीति की तासीर ऐसी रही है कि वहां कभी भी किसी एक पार्टी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। हमेशा छोटे दलों और क्षेत्रीय समूहों के साथ मिलकर गठबंधन सरकारें चलती रही हैं। इस चुनाव में भी यह देखना अहम होगा कि कौन सी छोटी पार्टियां या किंगमेकर दल सरकार बनाने की चाबी अपने पास रखते हैं।

शुरुआती रुझानों और एग्जिट पोल के बाद राजनीतिक बयानों का दौर भी तेज हो गया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सा'र ने विपक्षी दलों की तरफ से जश्न मनाने की शुरुआती गतिविधियों को समय से पहले बताया है और यह साफ किया है कि लिकुड पार्टी सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरने की स्थिति में है।

केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा आधिकारिक वोटों की गिनती का काम तेजी से जारी है, लेकिन अंतिम परिणामों को सामने आने में कुछ दिन या हफ्ते लग सकते हैं। जब तक पूरी मतगणना पूरी नहीं हो जाती, तब तक तस्वीर धुंधली ही रहेगी कि इजरायल की सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।

इस चुनाव के नतीजे इस बात का बड़ा फैसला करेंगे कि क्या इजरायल में नेतन्याहू का लंबा और प्रभावी राजनीतिक कार्यकाल अब थमने जा रहा है या वह किसी तरह राजनीतिक तिकड़म लगाकर सत्ता में बने रहने का रास्ता खोज लेंगे। क्षेत्रीय मोर्चों पर जारी तनाव और देश की आंतरिक स्थिरता के लिहाज से भी यह परिणाम बेहद दूरगामी असर डालने वाले हैं।

अब असली सवाल यह है कि क्या अंतिम चुनावी नतीजे एग्जिट पोल की इस बराबरी को किसी एक पक्ष के हक में मोड़ पाएंगे या नहीं। अगर गतिरोध बरकरार रहता है, तो अगली सरकार के गठन के लिए इजरायली संसद में नया राजनीतिक समीकरण किस रूप में सामने आएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

इज़राइल में कल, 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव हुए। शुरुआती एग्ज़िट पोल के मुताबिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ा झटका लगा है, लेकिन विपक्ष को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।

नेतन्याहू समर्थक गठबंधन 50–51 सीटें गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट 51–52 सीटें अरब नेतृत्व वाली पार्टियाँ लगभग 18 सीटें ये एग्ज़िट पोल के अनुमान हैं, आधिकारिक नतीजे नहीं। सरकार बनाने के लिए 120 में से 61 सीटों का समर्थन चाहिए।