इजरायल में हुए नए आम चुनाव के शुरुआती एग्जिट पोल ने राजनीतिक तस्वीर साफ कर दी है, जहां मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिखाई दे रहा है। विभिन्न प्रमुख नेटवर्क के एग्जिट पोल के मुताबिक, विपक्षी नेता गॉडी आइसेनकोट का ब्लॉक और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कैंप लगभग 50 से 52 सीटों के बीच कांटे की टक्कर में फंसे हुए हैं।
इजरायल की संसद केनेसैट में सरकार बनाने और बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। वर्तमान एग्जिट पोल के नतीजे दोनों मुख्य खेमों को इस जादुई आंकड़े से दूर रख रहे हैं, जिससे साफ है कि चुनाव के बाद एक बार फिर जोड़-तोड़ और गठबंधन की राजनीति का दौर तय माना जा रहा है।
यह चुनाव इजरायल के इतिहास के सबसे बड़े सुरक्षा संकट और 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमलों के बाद पहली बार आयोजित किए गए हैं। इन हमलों के बाद से गाजा, लेबनान और ईरान के मोर्चों पर लगातार युद्ध की स्थिति बनी हुई है, जिसने देश की आंतरिक राजनीति को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया और मतदान प्रतिशत 77.7% तक पहुंच गया। पिछले दो दशकों में यह सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया है, जो यह बताता है कि युद्ध और सुरक्षा संकट के इस दौर में आम जनता देश की दिशा तय करने में कितनी सक्रिय रूप से शामिल हुई है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पिछले तीन दशकों में से लगभग 19 साल तक सत्ता की कमान संभाल चुके हैं और वर्तमान में वह भ्रष्टाचार के मामलों का भी सामना कर रहे हैं। उनके नेतृत्व वाला लिकुड खेमा और उनके दक्षिणपंथी सहयोगी देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के नाम पर वोट मांग रहे हैं, जबकि अमेरिकी समर्थन को भी वे अपनी ताकत बता रहे हैं।
दूसरी ओर, विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गॉडी आइसेनकोट का 'परिवर्तन ब्लॉक' नेतन्याहू सरकार की नीतियों और 7 अक्टूबर की सुरक्षा चूक को बड़ा मुद्दा बना रहा है। आइसेनकोट ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा कि एग्जिट पोल के नतीजे नेतन्याहू और उनकी सरकार में जनता के पूर्ण अविश्वास को साफ तौर पर दर्शाते हैं।
इजरायली राजनीति की तासीर ऐसी रही है कि वहां कभी भी किसी एक पार्टी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। हमेशा छोटे दलों और क्षेत्रीय समूहों के साथ मिलकर गठबंधन सरकारें चलती रही हैं। इस चुनाव में भी यह देखना अहम होगा कि कौन सी छोटी पार्टियां या किंगमेकर दल सरकार बनाने की चाबी अपने पास रखते हैं।
शुरुआती रुझानों और एग्जिट पोल के बाद राजनीतिक बयानों का दौर भी तेज हो गया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सा'र ने विपक्षी दलों की तरफ से जश्न मनाने की शुरुआती गतिविधियों को समय से पहले बताया है और यह साफ किया है कि लिकुड पार्टी सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरने की स्थिति में है।
केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा आधिकारिक वोटों की गिनती का काम तेजी से जारी है, लेकिन अंतिम परिणामों को सामने आने में कुछ दिन या हफ्ते लग सकते हैं। जब तक पूरी मतगणना पूरी नहीं हो जाती, तब तक तस्वीर धुंधली ही रहेगी कि इजरायल की सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।
इस चुनाव के नतीजे इस बात का बड़ा फैसला करेंगे कि क्या इजरायल में नेतन्याहू का लंबा और प्रभावी राजनीतिक कार्यकाल अब थमने जा रहा है या वह किसी तरह राजनीतिक तिकड़म लगाकर सत्ता में बने रहने का रास्ता खोज लेंगे। क्षेत्रीय मोर्चों पर जारी तनाव और देश की आंतरिक स्थिरता के लिहाज से भी यह परिणाम बेहद दूरगामी असर डालने वाले हैं।
अब असली सवाल यह है कि क्या अंतिम चुनावी नतीजे एग्जिट पोल की इस बराबरी को किसी एक पक्ष के हक में मोड़ पाएंगे या नहीं। अगर गतिरोध बरकरार रहता है, तो अगली सरकार के गठन के लिए इजरायली संसद में नया राजनीतिक समीकरण किस रूप में सामने आएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
इज़राइल में कल, 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव हुए। शुरुआती एग्ज़िट पोल के मुताबिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ा झटका लगा है, लेकिन विपक्ष को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।
नेतन्याहू समर्थक गठबंधन 50–51 सीटें गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट 51–52 सीटें अरब नेतृत्व वाली पार्टियाँ लगभग 18 सीटें ये एग्ज़िट पोल के अनुमान हैं, आधिकारिक नतीजे नहीं। सरकार बनाने के लिए 120 में से 61 सीटों का समर्थन चाहिए।