अमरीकी मध्यावधि चुनाव: कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का कब्जा, ट्रंप के लिए बड़ा झटका
अमरीकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के मध्य में एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
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माइक जॉनसन हाउस रिपब्लिकन नेता पद की दौड़ से हटेंगे
हाउस रिपब्लिकन नेता और स्पीकर माइक जॉनसन अगले कांग्रेस में पार्टी के शीर्ष हाउस पद के लिए दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे। यह फैसला रिपब्लिकन पार्टी की मध्यावधि चुनाव में बड़ी हार और हाउस बहुमत गंवाने के बाद सामने आया है। जॉनसन के हटने से रिपब्लिकन नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी; पार्टी के नेतृत्व चुनाव 10 नवंबर को होने हैं।
UPDATE
डेमोक्रेट्स ने टेक्सस, कंसास और साउथ कैरोलाइना जैसी रिपब्लिकन गढ़ों में सीटें पलटीं
सीनेट पर नियंत्रण हासिल करने के दौरान डेमोक्रेट्स ने टेक्सस, कंसास और साउथ कैरोलाइना जैसे लंबे समय से रिपब्लिकन माने जाने वाले राज्यों में जीत दर्ज की। इन नतीजों ने पार्टी की बढ़त को सिर्फ स्विंग राज्यों तक सीमित नहीं रहने दिया। रोल कॉल के मुताबिक, डेमोक्रेटिक बहुमत अब राष्ट्रपति ट्रंप के एजेंडे पर रोक लगाने, जांच शुरू करने और अपनी प्राथमिकताओं पर वोट कराने की स्थिति में होगा।
सपेरा की नज़र
वॉल स्ट्रीट में तेज़ी, डेमोक्रेटिक जीत के बाद डाउ जोंस 1,000 अंक से ज्यादा चढ़ा
डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करने के बाद बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेज़ उछाल देखा गया। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, डाउ जोंस 1,000 अंकों से ज्यादा ऊपर गया और बाजार करीब तीन महीनों की अपनी सबसे अच्छी बढ़त की ओर बढ़ा। विश्लेषकों के अनुसार, डेमोक्रेटिक कांग्रेस ट्रंप प्रशासन के बड़े खर्च और कर कटौती प्रस्तावों पर रोक लगा सकती है, जिससे वित्तीय अनुशासन की उम्मीद बनी है।
समझिए
युवा, हिस्पैनिक और अश्वेत मतदाताओं का समर्थन डेमोक्रेट्स की ओर लौटा
एपी वोटर पोल के मुताबिक, 2024 में ट्रंप की ओर गए कुछ अहम मतदाता समूहों ने इस बार डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया। युवा, हिस्पैनिक और अश्वेत मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स की स्थिति बेहतर हुई, जबकि मध्यमार्गी मतदाताओं ने भी कई अहम सीनेट मुकाबलों में पार्टी का साथ दिया। पोल के अनुसार, कांग्रेस को राष्ट्रपति पर अधिक नियंत्रण रखने की जरूरत मानने वाले मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक जीत में भूमिका निभाई।
समझिए
ट्रंप समर्थित नए चुनावी नक्शे भी रिपब्लिकन बहुमत नहीं बचा सके
राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थन से आठ राज्यों में कांग्रेस सीटों की सीमाएं बदली गई थीं, ताकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों को मध्यावधि चुनाव में बढ़त मिल सके। एपी के मुताबिक, इसके बावजूद डेमोक्रेट्स ने कई ऐसे जिलों में जीत दर्ज की जो 2024 में ट्रंप के पक्ष में गए थे। नतीजों के बाद डेमोक्रेटिक नियंत्रण वाले राज्यों में 2028 से पहले नए चुनावी नक्शे बनाने की कोशिशें तेज हो सकती हैं।
बयान
विदेशी नेताओं ने अमेरिकी नतीजों को ट्रंप की विदेश नीति पर जनमत बताया
अमेरिकी मध्यावधि नतीजों के बाद कुछ विदेशी नेताओं और सांसदों ने ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति में संभावित बदलाव की उम्मीद जताई है। एपी के मुताबिक, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने ईरान युद्ध खत्म करने पर ध्यान बढ़ने की आशा जताई। एक जर्मन सांसद ने नतीजों को ट्रंप की विदेश नीति पर मतदाताओं के फैसले से जोड़ा। हालांकि, इन प्रतिक्रियाओं से अमेरिकी नीति में तत्काल बदलाव तय नहीं माना जा सकता।
बयान
ट्रंप ने डेमोक्रेट्स के साथ काम की बात कही, लेकिन वीटो की चेतावनी दी
डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों पर कब्जे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह कुछ मुद्दों पर उनके साथ काम कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया कि डेमोक्रेटिक कांग्रेस से आने वाले उन्हें ‘पागल’ लगने वाले विधेयकों पर वह वीटो का इस्तेमाल करेंगे। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में ईरान युद्ध को रिपब्लिकन हार की एक वजह मानने की बात भी कही।
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अमरीकी राजनीति में मध्यावधि चुनाव हमेशा से मौजूदा राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता का फैसला माने जाते हैं। इस बार के चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हुए हैं। शुरुआती परिणामों और पुष्ट जानकारी के अनुसार, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों—सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स—पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस जीत के बाद से वाशिंगटन की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
चुनाव परिणामों के मोर्चे पर डेमोक्रेट्स ने कई पारंपरिक रूप से मजबूत माने जाने वाले रिपब्लिकन गढ़ों में भी सेंध लगाई है। टेक्सास, दक्षिण कैरोलिना, कंसास, ओहायो और मेन जैसे राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा विस्कॉन्सिन और नेवादा जैसे अहम राज्यों में भी गवर्नर पद के चुनावों में डेमोक्रेट्स को सफलता मिली है। सीनेट और हाउस में बहुमत मिलने से अब संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति बेहद मजबूत हो गई है और वे विधायी एजेंडे पर अपनी पकड़ बना सकेंगे।
इस हार के पीछे के कारणों पर खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने स्वीकार किया है कि ईरान युद्ध और देश में बढ़ती जीवन लागत यानी महंगाई इस हार के पीछे मुख्य कारक रहे हैं। अमरीकी जनता के बीच हाल के दिनों में इन मुद्दों को लेकर भारी असंतोष देखा गया था, जिसका असर मतदान के दिन साफ तौर पर नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि जनता ने विदेश नीति के फैसलों और घरेलू आर्थिक दबाव के खिलाफ अपना गुस्सा मतपेटी के जरिए जाहिर किया है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस जीत को देश की मौजूदा दिशा में एक बड़ा बदलाव बताया है। हाउस में शीर्ष डेमोक्रेट नेता हाकीम जेफ्रीज ने इसे 'लाल, सफेद और नीले रंग का क्षण' करार दिया है। उनका कहना है कि यह जीत अमरीकी नागरिकों की उन उम्मीदों को दर्शाती है जो वे देश में बदलाव और बेहतर नीतियों के रूप में देखना चाहते हैं। दूसरी ओर, विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इस नतीज़े के बाद वाशिंगटन की राजनीति में दो-दलीय व्यवस्था और मौजूदा नीतियों के खिलाफ असंतोष और गहरा सकता है।
चुनाव परिणामों के तुरंत बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी नेतृत्व को लेकर फेरबदल शुरू हो गया है। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने अपने स्टाफ को स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी सत्र में हाउस अल्पसंख्यक नेता के पद के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस घोषणा के बाद पार्टी के भीतर नए नेतृत्व को चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व के चुनाव निर्धारित तिथि पर होने हैं और इसके लिए उम्मीदवारों को तय समय सीमा के भीतर अपनी उम्मीदवारी घोषित करनी होगी। ओहायो के सांसद जिम जॉर्डन जैसे चेहरों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का यह नियंत्रण आने वाले समय में राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासनिक कामकाज को काफी प्रभावित कर सकता है। संसद के दोनों सदनों में विपक्ष का बहुमत होने के कारण राष्ट्रपति के विधायी प्रस्तावों और नीतियों को लागू करने में भारी गतिरोध देखने को मिल सकता है। ट्रंप प्रशासन के बचे हुए कार्यकाल के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती साबित होगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि रिपब्लिकन पार्टी अपनी आंतरिक रणनीति में क्या बदलाव करती है और डेमोक्रेट्स इस नए बहुमत का इस्तेमाल किस तरह से करते हैं।