आंतरिक खींचतान और आरटीआई का खुलासा
भारत निर्वाचन आयोग के भीतर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कार्य आवंटन और नियंत्रण को लेकर पैदा हुआ आंतरिक गतिरोध अब सार्वजनिक हो गया है। एक आरटीआई के जवाब में सामने आए दस्तावेजों से पता चला है कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले दिनों मंत्रिमंडल सचिवालय को पत्र लिखकर वरिष्ठ उप निर्वाचन अधिकारी मनीष गर्ग के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में मंत्रिमंडल सचिवालय ने आंतरिक रूप से विचार-विमर्श करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, और व्यक्तिगत क्षमता में लिखे गए पत्रों पर सीधी कार्रवाई करना कार्यकारी दखल माना जा सकता है।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब प्रशासन प्रभाग के प्रभारी उप निर्वाचन आयुक्त भानु प्रकाश यतुरु छुट्टी पर गए और मनीष गर्ग को इस प्रभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इसके बाद 28 जुलाई को मनीष गर्ग ने एक आदेश जारी कर वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कार्य आवंटन तय किया था। चुनाव आयुक्तों ने इस आदेश पर आपत्ति जताई थी कि यह बिना आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए जारी किया गया था।
मंत्रिमंडल सचिवालय की प्रतिक्रिया और फाइल नोटिंग्स
शिकायतों के चलते दोनों चुनाव आयुक्तों ने 29 जुलाई को मंत्रिमंडल सचिव टी.वी. सोमनाथण को पत्र भेजे। अगस्त के पहले हफ्ते में मंत्रिमंडल सचिवालय के भीतर इस मामले पर फाइल नोटिंग्स और चर्चाएं हुईं। सचिवालय की आंतरिक फाइलों में यह राय बनी कि चूंकि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, इसलिए इन पत्रों पर सीधे तौर पर कोई कार्यकारी कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।
पांच अगस्त को कैबिनेट सचिव ने दोनों चुनाव आयुक्तों को पत्र मिलने की औपचारिक पावती भेजी। इसकी एक प्रति मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पीपीएस और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव को भी भेजी गई थी। यह पूरी जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश के. बात्रा द्वारा दायर आवेदन के जवाब में सामने आई है।
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