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कुर्सी का खेल• ARTICLE #599• 16 अक्टूबर 2026 को 11:53 pm बजे

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को हाईकोर्ट से मंजूरी, केंद्र सरकार की रोक को किया खारिज

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया है जिसके तहत मुख्यमंत्री भगवंत मान की फ्रांस यात्रा की राजनीतिक मंजूरी रोकी गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद सीएम मान के पेरिस जाने का रास्ता साफ हो गया है।

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को हाईकोर्ट से मंजूरी, केंद्र सरकार की रोक को किया खारिज
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की विदेश यात्रा को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच चल रहे तकरार में अदालत की ओर से एक बड़ा फैसला सामने आया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान को फ्रांस जाने की राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया था। अदालत की इस हरी झंडी के बाद अब सीएम मान के फ्रांस दौरे का रास्ता साफ हो गया है।

यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री की आगामी फ्रांस यात्रा से जुड़ा है। तय कार्यक्रम के अनुसार, भगवंत मान को 17 से 21 अक्टूबर तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनी 'SIAL Paris 2026' में शामिल होना है। इस प्रदर्शनी में पंजाब कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन यानी मार्कफेड ने अपना एक स्टॉल लगाया है। राज्य सरकार का कहना है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पंजाब के कृषि और खाद्य-प्रसंस्करण उत्पादों को दुनिया के सामने लाना और राज्य में नए व्यापार व निवेश को बढ़ावा देना है।

लेकिन इस आधिकारिक यात्रा को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर पेच फंस गया था। यह चौथा मौका था जब केंद्र सरकार ने सीएम मान की किसी विदेश यात्रा पर रोक लगाई थी। इससे पहले यूनाइटेड किंगडम, इजराइल, नीदरलैंड, चेक गणराज्य और जापान की प्रस्तावित यात्राओं के लिए भी केंद्र से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिल पाई थी। जब सितंबर महीने में पंजाब सरकार ने फ्रांस यात्रा के लिए आवेदन किया और एक बार फिर अनुमति मिलने में अड़चन आई, तो मामला अदालत तक पहुंच गया। नियमों के मुताबिक, देश के किसी भी मुख्यमंत्री या राज्य मंत्री को आधिकारिक या निजी विदेश यात्रा के लिए केंद्र सरकार से कई स्तर पर मंजूरी लेनी होती है। इसमें मुख्य रूप से विदेश मंत्रालय यानी MEA से राजनीतिक मंजूरी, गृह मंत्रालय से FCRA मंजूरी और वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की मंजूरी शामिल होती है। कैबिनेट सचिवालय के नियमों के तहत इन सभी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य माना गया है।

अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से यात्रा को रोकने के पीछे सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और उचित निमंत्रण न होने का हवाला दिया गया था। केंद्र का तर्क था कि इन प्रशासनिक और सुरक्षा बिंदुओं के आधार पर ही राजनीतिक मंजूरी नहीं दी गई थी। वहीं, पंजाब सरकार ने 56 पन्नों की अपनी याचिका में इन तर्कों को मनमाने और आधारहीन बताया। राज्य सरकार का पक्ष था कि सभी जरूरी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आवेदन दिया गया था और इस तरह की रोक से राज्य के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचता है।

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की बेंच ने पंजाब सरकार की याचिका को स्वीकार किया और केंद्र के इनकार करने वाले आदेश को खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले से जहां एक तरफ राज्य सरकार को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक व संवैधानिक अधिकारों के दायरे को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि हाईकोर्ट को अनुमति देनी ही थी, तो इसके लिए अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को देश से बाहर जाने के लिए भी हर बार कानूनी लड़ाई लड़नी होगी।

यह मामला भारत के संघीय ढांचे और राज्यों के कामकाज में केंद्र की प्रशासनिक मंजूरियों के बीच के संतुलन को गहराई से रेखांकित करता है। फिलहाल अदालत के इस आदेश के बाद मुख्यमंत्री तय कार्यक्रम के तहत फ्रांस के दौरे पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस तरह के मामलों को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच भविष्य में कोई स्पष्ट और तयशुदा नियम सामने आते हैं या नहीं।

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