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सपेरा की नज़र• ARTICLE #584• 16 अक्टूबर 2026 को 10:35 pm बजे

पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ जंग और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर खड़े हुए बड़े सवाल

पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की सरेआम हत्या के बाद राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

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पंजाब में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और युवाओं में नशे की लत का मुद्दा एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की सरेआम गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद से पूरे राज्य में तनाव का माहौल है। यह घटना तब सामने आई जब राज्य सरकार की ओर से नशीले पदार्थों के खिलाफ कड़े कदम उठाने और विशेष अभियानों के दावे किए जा रहे थे। इस हत्या के विरोध में विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थन से पंजाब बंद का भी आयोजन किया गया, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या उस समय हुई जब वह फेसबुक पर लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान एक केमिस्ट से कथित अवैध दवाओं की बिक्री को लेकर सवाल कर रहे थे। पिछले करीब तीन वर्षों से वे केमिस्टों द्वारा नशीली गोलियों और कैप्सूलों की अवैध बिक्री के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे थे। इस मामले में मानसा पुलिस ने मृतक के पिता भीम सिंह की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है, और मामले की आगे की जांच जारी है।

इस सनसनीखेज घटना के बाद राजनीतिक दलों और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल और अन्य विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है। उनका आरोप है कि सरकार नशा तस्करों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है और अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है। इसके साथ ही, झोटा के परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे की मांग करते हुए तब तक अंतिम संस्कार करने से इनकार किया है जब तक उनकी सभी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती।

दूसरी ओर, पूर्व डीजीपी शशि कांत ने एक सार्वजनिक मंच पर अपने विचार रखते हुए कहा है कि पंजाब में नशीले पदार्थों के संकट को लेकर शायद ही कोई राजनीतिक दल वास्तव में गंभीर रहा है। उनके अनुसार, इस अवैध कारोबार के पीछे तस्करों, स्थानीय पुलिस, नौकरशाही और राजनेताओं की पुरानी सांठगांठ रही है, जिसे तोड़ना किसी भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति और नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है और राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगने की बात कही है।

सत्ताधारी आम आदमी पार्टी सरकार का पक्ष है कि राज्य में नशे के खात्मा के लिए 'युद्ध नशे विरुद्ध' अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और ड्रग्स विंग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले डेढ़ साल के दौरान हजारों निरीक्षण किए गए हैं और करोड़ों रुपये मूल्य की अवैध दवाएं जब्त की गई हैं। सरकार का दावा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले सैकड़ों केमिस्टों के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए हैं और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।

मानसा की घटना के कुछ ही दिनों बाद श्री हरगोबिंदपुर क्षेत्र में एक अन्य व्यक्ति बिक्रमजीत सिंह की भी नशा बेचने का विरोध करने पर हत्या किए जाने की खबर सामने आई, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने न केवल आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि यह भी उजागर किया है कि जमीनी स्तर पर नशा तस्करों के हौसले कितने बुलंद हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासनिक सख्ती और ताबड़तोड़ छापों के दावों के बावजूद धरातल पर अवैध दवाइयों का कारोबार और अपराधियों की सक्रियता पूरी तरह क्यों नहीं थम पा रही है। क्या नशा विरोधी अभियानों और पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई गंभीर कमी रह गई है, जिसे सुधारने की तत्काल आवश्यकता है। इन तमाम सवालों के बीच पीड़ित परिवार का संघर्ष और राजनीतिक दलों का दबाव सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां इस सांठगांठ की तह तक पहुंचकर किस प्रकार ठोस कार्रवाई करती हैं।

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