आधुनिक युद्धों में नया मोर्चा बने डेटा सेंटर्स
आधुनिक समय के युद्धों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब संघर्ष केवल जमीन, समुद्र या आसमान तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल और क्लाउड बुनियादी ढांचा भी इसकी चपेट में आ रहा है। दुनिया भर में एआई बूम के कारण कंप्यूटिंग पावर और डेटा स्टोरेज की मांग में भारी इजाफा हुआ है, जिस पर टेक कंपनियों ने अरबों डॉलर का निवेश किया है। आज के समय में बैंक, अस्पताल, ऊर्जा आपूर्तिकर्ता और सरकारी सेवाएं अपने रोजमर्रा के कामकाज के लिए पूरी तरह डेटा सेंटर्स पर निर्भर करती हैं। यही वजह है कि ये डिजिटल केंद्र अब रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और सैन्य हमलों के नए लक्ष्य बनते जा रहे हैं।
इस बदलाव की बानगी हालिया महीनों में कई संघर्ष क्षेत्रों में देखने को मिली है। मार्च 2026 में ईरान द्वारा मध्य पूर्व में किए गए अभियानों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अमेज़ॅन की दो सुविधाओं और बहरीन में एक सुविधा को निशाना बनाया गया था। इन हमलों के बाद अब खाड़ी देशों में डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। उदाहरण के लिए, यूएई अब अबू धाबी में अपने प्रस्तावित 5-गीगावाट एआई डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की योजनाओं में संशोधन करने पर विचार कर रहा है, ताकि बढ़ते सुरक्षा जोखिमों से निपटा जा सके।
यूक्रेन और रूस के बीच डिजिटल बुनियादी ढांचे पर वार
डिजिटल बुनियादी ढांचे पर हमलों का यह सिलसिला केवल खाड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा यूरोप और पूर्वी यूरोप तक भी फैल चुका है। सितंबर 2026 के अंत में रूस द्वारा यूक्रेन के डेटा सेंटर्स पर हमले किए गए। रूसी रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा था कि ये डेटा केंद्र यूक्रेनी सशस्त्र बलों के लिए खुफिया डेटा प्रोसेस और प्रसारित करने का काम कर रहे थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है, लेकिन युद्ध क्षेत्र में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भेदने की रणनीति अब खुलकर सामने आ रही है।
इसके जवाब में यूक्रेन की ओर से भी डिजिटल ठिकानों को निशाना बनाने की बात सामने आई। अक्टूबर 2026 के मध्य में, यूक्रेन ने रूस के सबसे बड़े तकनीकी दिग्गजों और डेटा सेंटर्स पर ड्रोन हमले शुरू किए। इन हमलों में रूस के प्रमुख तकनीकी प्लेटफॉर्म 'यांडेक्स' (Yandex) और स्बरबैंक (Sberbank) के डेटा सेंटर्स को चपेट में लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, यांडेक्स के पास देश भर में छह बड़े डेटा सेंटर हैं, जिनमें से हालिया हमलों के बाद दो पूरी तरह से ऑफ़लाइन हो गए। इन हमलों के चलते रूसी नागरिकों की ईमेल सेवाओं, टैक्सी बुकिंग और बस सेवाओं जैसी रोजमर्रा की वाणिज्यिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय कानून और भविष्य की चिंताएं
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इन जवाबी कार्रवाइयों का बचाव करते हुए कहा कि वे हमेशा वैसे ही जवाब देते हैं और यूक्रेनी डेटा सेंटर्स पर लगातार हो रहे हमलों के मद्देनजर यह एक सममित प्रतिक्रिया है। दूसरी ओर, इस तरह के हमलों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के जानकारों और सुरक्षा विश्लेषकों के सामने एक नई बहस खड़ी कर दी है। जानकारों का कहना है कि डेटा सेंटर्स मूल रूप से दोहरे उपयोग यानी नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों वाले बुनियादी ढांचे होते हैं, और अंतरराष्ट्रीय कानून अभी इस बात पर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि इन्हें युद्ध के समय किस श्रेणी में रखा जाए।
डेटा सेंटर्स की रणनीतिक महत्ता बढ़ने के पीछे आधुनिक सैन्य प्रणालियों में एआई का बढ़ता दखल भी एक बड़ा कारण है। युद्ध की योजना बनाने से लेकर ड्रोन टारगेटिंग तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से हो रहा है। इसके अलावा, पैलंटिर जैसी अमेरिकी टेक कंपनियां यूक्रेन के साथ मिलकर एआई-संचालित हथियार विकसित करने में सहयोग कर रही हैं, जिससे इन तकनीकी केंद्रों की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
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