युद्धविराम के बीच गाजा में फिर भड़की हिंसा
गाजा पट्टी में युद्धविराम समझौते के बावजूद हिंसक घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा हमलों में कुल छह फलस्तीनियों की जान चली गई है, जिससे एक बार फिर इलाके की सुरक्षा और शांति समझौतों के अमल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा घटनाओं में राफा के पश्चिम में स्थित अल-मावासी क्षेत्र और मघाजी शरणार्थी शिविर को निशाना बनाया गया।
गाजा सरकार के मीडिया कार्यालय और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अल-मावासी क्षेत्र में अर्थव्यवस्था मंत्रालय की एक चौकी पर इजरायली हमला हुआ। इस चौकी का उपयोग केरेम शलोम क्रॉसिंग से आने वाले ट्रकों और सामानों की जांच करने तथा अवैध सामग्री की तस्करी रोकने के लिए किया जा रहा था। इस हमले में मंत्रालय के चार सरकारी कर्मचारी मारे गए और करीब 30 लोग घायल हो गए, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
इसके अलावा, मघाजी शरणार्थी शिविर के प्रवेश द्वार के पास सालाह अल-दीन स्ट्रीट पर एक नागरिक वाहन को भी ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया। इस दूसरे हमले में दो और फलस्तीनियों की मौत हो गई। स्थानीय चश्मदीदों और रिपोर्टों के अनुसार, खान यूनिस और डेर अल-बलाह के पास भी इजरायली सैन्य वाहनों द्वारा भारी गोलीबारी और तोपखाने की गोलाबारी की गई है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
युद्धविराम समझौतों पर मंडराता खतरा
यह ताजा हिंसा ऐसे समय में हुई है जब अक्टूबर 2025 से गाजा में युद्धविराम समझौता लागू है। इस समझौते के तहत भारी बमबारी रोकने और बंधकों की रिहाई पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद छिटपुट और दैनिक संघर्ष जारी हैं। गाजा के अधिकारियों का कहना है कि युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक इस तरह के उल्लंघनों में 1,500 से अधिक फलस्तीनी अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं।
दूसरी ओर, इजरायली सेना का पक्ष है कि वे सुरक्षा कारणों से और हमास के खिलाफ अपनी कार्रवाई के तहत कदम उठा रहे हैं। इजरायली सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वे आतंकवादियों को निशाना बना रहे हैं, जबकि फलस्तीनी पक्ष का आरोप है कि इजरायल जानबूझकर नागरिकों और सरकारी संस्थानों को निशाना बना रहा है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर किया जा सके।
अक्टूबर 2023 में शुरू हुए इस लंबे संघर्ष के बाद से गाजा में मानवीय संकट पहले ही चरम पर पहुंच चुका है। युद्धविराम समझौतों के बावजूद जारी इन हमलों ने यह साफ कर दिया है कि मैदानी स्तर पर शांति बहाली की राह अभी बेहद कठिन है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए समझौतों का पूरी तरह पालन कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के जरिए इस टूटते हुए युद्धविराम को बचाया जा सकेगा या फिर गाजा में संघर्ष एक बार फिर से पूर्ण पैमाने पर भड़क उठेगा। आने वाले दिनों में कूटनीतिक स्तर पर होने वाले प्रयासों से ही यह तय होगा कि इस हिंसा पर रोक लग पाती है या नहीं।
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