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जंग का मैदान• ARTICLE #686• 24 अक्टूबर 2026 को 12:36 pm बजे

इजरायली चुनावों में नेतन्याहू के सामने चुनौती, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट पोल में आगे

इजरायल के हालिया जनमत सर्वेक्षणों में पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट की यशार पार्टी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी से आगे निकल गई है।

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इजरायली चुनावों में नेतन्याहू के सामने चुनौती, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट पोल में आगे
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इजरायल की राजनीति में एक नया मोड़ सामने आया है, जहां देश के पूर्व सैन्य प्रमुख और यशार पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट हालिया ओपिनियन पोल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आगे चल रहे हैं। अक्टूबर 2026 में सामने आए इन जनमत सर्वेक्षणों के नतीजे इजरायली राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों से देश में जारी युद्ध और सुरक्षा हालात के बीच मतदाता बदलाव की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। N12 न्यूज और चैनल 13 द्वारा अक्टूबर 2026 के अंत में प्रकाशित किए गए नए जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, गादी आइजेनकोट की यशार पार्टी को अन्य दलों के मुकाबले बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। N12 पोल में यशार पार्टी को 23 सीटें और चैनल 13 पोल में 20 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। इन दोनों ही प्रमुख सर्वेक्षणों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 19 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर नजर आ रही है। चुनावी समीकरणों के लिहाज से विपक्षी गुट को इन पोल में नेतन्याहू के गुट से आगे रखा गया है। N12 पोल के मुताबिक विपक्षी गुट को 55 सीटें और नेतन्याहू के गुट को 51 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि चैनल 13 पोल में आइजेनकोट का गुट 52 सीटों पर और नेतन्याहू का गुट 49 सीटों पर आंका गया है। इजरायल में लंबे समय से शासन कर रहे बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह आंकड़े एक बड़ी राजनीतिक चुनौती की तरह हैं। गादी आइजेनकोट 2015 से 2019 तक इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं और सुरक्षा मामलों में उनका एक लंबा प्रशासनिक और सैन्य अनुभव रहा है। मोरक्को के यहूदी आप्रवासियों के परिवार से ताल्लुक रखने वाले आइजेनकोट यदि भविष्य में प्रधानमंत्री पद तक पहुंचते हैं, तो वह इस पद पर पहुंचने वाले सेफर्डिक मूल के पहले नेता होंगे। 66 वर्षीय आइजेनकोट ने 2006 में लेबनान संघर्ष के दौरान अपनी रणनीतिक नीतियों के लिए पहचान बनाई थी। इसके अलावा गाजा में युद्ध के दौरान उनके बेटे और दो भतीजों के मारे जाने के बाद से उन्हें जनता के बीच एक अलग तरह की सहानुभूति और सम्मान भी मिला है। राजनीतिक मोर्चे पर आइजेनकोट ने देश को एकजुट करने, न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा करने, कानून के शासन और एक स्वतंत्र प्रेस को बनाए रखने का संकल्प लिया है। वेस्ट बैंक और गाजा के मोर्चे पर भी उनके विचार चर्चा में रहे हैं। उन्होंने वेस्ट बैंक में अनधिकृत बस्तियों के प्रसार का विरोध किया है और चरमपंथियों द्वारा फिलिस्तीनियों पर किए जाने वाले हमलों को गलत ठहराया है। गाजा के संबंध में उनका रुख हमास के शासन को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में केंद्रित रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें हाल ही में कुछ तीखी टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा है। चैनल 14 के एक टिप्पणीकार द्वारा उनके खिलाफ की गई एक अपमानजनक टिप्पणी की देश के कई राजनीतिक हलकों में व्यापक निंदा की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी उसकी आलोचना की थी। इस राजनीतिक उठापटक के बीच इजरायल के आगामी चुनावी समीकरण इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि कई छोटे दल चुनाव के लिए तय 3.25 प्रतिशत के चुनावी थ्रेशोल्ड को पार कर पाते हैं या नहीं। इनमें 'पीपल ऑफ इजरायल' और 'रिजर्व्हिस्ट्स-इकोनॉमिक' जैसे नए दल शामिल हैं। यदि ये दल थ्रेशोल्ड पार करते हैं, तो संसद में सीटों का गणित पूरी तरह बदल सकता है। इजरायल के मतदाता इस समय अधिक शांत, जिम्मेदार और सुरक्षा के मोर्चे पर संतुलित नेतृत्व की तलाश कर रहे हैं। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में ओपिनियन पोल के आंकड़े भले ही आइजेनकोट के पक्ष में जाते दिख रहे हों, लेकिन अंतिम चुनावी नतीजे इस बात पर टिके होंगे कि मतदाता मतदान के दिन किसे चुनते हैं और क्या विपक्षी दल एक स्थिर सरकार बनाने में सक्षम हो पाते हैं या नहीं।

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