लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने साफ किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए यदि संसद में कोई नया नोटिस पेश किया जाता है, तो उस पर पूरी तरह से स्थापित संसदीय नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही विचार किया जाएगा।
संसदीय नियमों और प्रावधानों के मुताबिक, देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया बेहद कड़े और तय संवैधानिक दायरे में आती है। लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सीईसी को हटाने की प्रक्रिया वही है जो सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए अपनाई जाती है।
संविधान के अनुच्छेद 124 और न्यायाधीश जांच अधिनियम के तहत इस प्रक्रिया में साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी होता है।
हाल के दिनों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध जताया गया है, जिसके चलते नए नोटिस की अटकलें लगाई जा रही हैं।
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