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जंग का मैदान• ARTICLE #619• 19 अक्टूबर 2026 को 7:42 am बजे

सऊदी अरब के मजबूत रक्षा तंत्र को हूती हमलों ने कैसे दी चुनौती

यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के प्रमुख ठिकानों पर किए गए हमलों ने देश की भारी-भरकम और महंगी सैन्य रक्षा प्रणालियों की सीमाओं को उजागर कर दिया है।

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सऊदी अरब के मजबूत रक्षा तंत्र को हूती हमलों ने कैसे दी चुनौती

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और अन्य प्रमुख ठिकानों पर हाल ही में किए गए हमलों ने मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इन हमलों में सऊदी अरब की भारी-भरकम और महंगी सैन्य रक्षा प्रणालियों की सीमाओं को स्पष्ट रूप से उजागर किया गया है।

हालिया संघर्ष के दौरान हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और राष्ट्रपति भवन परिसर जैसे प्रमुख स्थलों को सटीक निशानों पर साधा। इन हमलों में कम से कम 14 से 19 लोगों की मौत की खबर सामने आई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इन हमलों के कारण देश की कई उड़ानों को भी रद्द करना पड़ा, जिससे नागरिक सुरक्षा और हवाई यातायात की सुरक्षा पर तुरंत असर पड़ा।

सऊदी अरब दुनिया में अमेरिकी हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है और उसके पास अत्याधुनिक एफ-15 लड़ाकू विमान और पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणालियां मौजूद हैं। देश इस साल अपनी रक्षा और सुरक्षा पर लगभग 64 अरब डॉलर से 96 अरब डॉलर के बीच भारी भरकम रकम खर्च कर रहा है। इसके बावजूद, सऊदी रक्षा तंत्र इन हमलों को पूरी तरह रोकने में कड़ा संघर्ष कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन हमलों की सफलता के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि हूती समूह कम लागत वाले छोटे ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलें और बैलिस्टिक मिसाइलों का मिश्रण इस्तेमाल कर रहा है। इन हथियारों का निर्माण काफी हद तक घरेलू स्तर पर और विदेशी हिस्सों की मदद से किया जाता है। इसके अलावा, विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों की योजना बनाने और लक्ष्य तय करने में खुफिया स्तर पर सहायता मिल रही है।

सऊदी अरब और उसके पश्चिमी सहयोगी हूतियों को ईरान के छद्म और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारक के रूप में देखते हैं। दूसरी ओर, ईरान इन आरोपों से इनकार करता है। ईरानी विदेश मंत्रालय का दावा है कि हूती पूरी तरह से स्वतंत्र अभिनेता हैं जो अपने हितों के आधार पर निर्णय लेते हैं। हालांकि, पश्चिमी अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें ईरान से व्यापक सैन्य और तकनीकी सहायता मिलती रही है।

सऊदी अरब ने 2015 में यमन के गृहयुद्ध में हस्तक्षेप किया था ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को बचाया जा सके और हूती विद्रोहियों को रोका जा सके। वर्ष 2022 में दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम लागू हुआ था, लेकिन गाजा युद्ध शुरू होने के बाद लाल सागर और आसपास के क्षेत्रों में तनाव फिर से बढ़ गया।

सऊदी अरब की भौगोलिक विशालता और पैट्रियट मिसाइल बैटरियों की दिशात्मक प्रकृति के कारण सभी कोणों से आने वाले छोटे ड्रोनों और मिसाइलों को रोकना बेहद जटिल हो गया है। पारंपरिक रक्षा प्रणालियों को महंगे मिसाइलों से लैस किया जाता है, जो सस्ते ड्रोनों के खिलाफ आर्थिक और रणनीतिक रूप से असमान साबित हो रही हैं।

इन हमलों से सऊदी अरब की आर्थिक और व्यावसायिक महत्वाकांक्षाओं को भी झटका लगा है, जिसमें देश को एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन और व्यापार हब बनाने की योजनाएं शामिल हैं। इससे यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या आधुनिक महंगी रक्षा प्रणालियां असममित युद्ध और सस्ते ड्रोनों के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी हैं या नहीं।

अभी यह साफ नहीं है कि सऊदी अरब इन रक्षात्मक विफलताओं के बाद हूती हमलों का जवाब किस सैन्य रणनीति से देगा और क्या यह तनाव पूरे क्षेत्र को एक बार फिर बड़े संघर्ष में खींचेगा या नहीं。

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