फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होरमुज इन दिनों वैश्विक संघर्ष का सबसे संवेदनशील केंद्र बन गया है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू होने के बाद से यह जलमार्ग गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस यहीं से गुजरती है, जिसके कारण इस मार्ग के बंद होने या पाबंदियों के दायरे में आने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में खलबली मच गई है।
अक्टूबर 2026 के मध्य में ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होरमुज के पास जहाजों पर हमलों की रफ्तार में अचानक तेजी देखी गई है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के शुरुआती हफ्तों में ही टैंकरों और मालवाहक जहाजों पर कम से कम 15 हमले दर्ज किए गए हैं। कतर के पास हाल ही में एक टैंकर पर कई प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे वहां हताहतों की सूचना मिली है। इसके अलावा कंटेनर जहाज 'GFS Pride' और मालवाहक जहाज 'Cape Dao' भी हमलों और आग लगने की घटनाओं के बाद डूब चुके हैं।
इस खतरनाक युद्ध क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के नाविकों और कप्तानों को भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि टैंकरों के कप्तानों को इस क्षेत्र से निकलने के लिए एक लाख डॉलर प्रति महीने तक का वेतन और पचास हजार डॉलर तक का बोनस दिया जा रहा है। लगातार होते हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार यानी लगभग 104 से 106 डॉलर के बीच ट्रेड कर रही हैं, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतों और महंगाई का दबाव बढ़ गया है।
इस जलमार्ग के नियंत्रण और तेल प्रवाह की मात्रा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तीखा जुबानी और सामरिक संघर्ष चल रहा है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और उसके सलाहकारों का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ होरमुज पूरी तरह से बंद है और उनके सशस्त्र बलों का उस पर पूर्ण नियंत्रण है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह उन मार्गों को अनुमति नहीं देगा जो उसकी नाकाबंदी को दरकिनार करते हैं। इसके विपरीत, अमेरिका का कहना है कि ईरान ने इस स्ट्रेट पर से अपना नियंत्रण खो दिया है और वहां से पहले की तरह ही भारी मात्रा में तेल का परिवहन जारी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि वह आने वाले नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई नया बड़ा सैन्य हमला नहीं करेंगे। हालांकि, अमेरिकी नौसेना और सहयोगियों द्वारा वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एस्कॉर्ट व्यवस्था और सुरक्षा पहरे लगातार जारी रखे गए हैं। दूसरी ओर, ईरान अपनी नौसैनिक गश्त, ड्रोन और नए हमलों के जरिए अपनी नाकाबंदी को लागू करने पर अड़ा हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो वैश्विक स्तर पर डीजल और ईंधन का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। सितंबर के दौरान खाड़ी से कच्चे तेल के निर्यात में आंशिक सुधार जरूर देखा गया था, लेकिन अक्टूबर के ताजा हमलों ने उस सुधार को बेपटरी कर दिया है। शिपिंग कंपनियों के सामने बीमा की भारी लागत और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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