रूस और यूक्रेन के बीच जंग के मोर्चे पर एक मानवीय समझौते की खबर सामने आई है। दोनों पक्षों ने दक्षिण यूक्रेन के खेरसॉन क्षेत्र में स्थित रूसी कब्जे वाले ओलेश्की शहर में एक स्थानीय मानवीय युद्धविराम पर सहमति जताई है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य शहर में फंसे हुए नागरिकों तक भोजन, पानी, बिजली और चिकित्सा आपूर्ति जैसी जरूरी चीजें पहुंचाना और वहां से सुरक्षित निकासी के लिए रास्ता बनाना है。
इस कूटनीतिक और मानवीय पहल के पीछे अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की मध्यस्थता और समन्वय को अहम बताया जा रहा है। व्हाइट हाउस और रूसी अधिकारियों की तरफ से इस बात की पुष्टि की गई है कि इस समझौते की शर्तें तय करने में मेलानिया ट्रंप ने दोनों देशों के नेतृत्व के साथ सीधे बातचीत की थी। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी अमेरिकी प्रथम महिला के इन प्रयासों का स्वागत किया है。
ओलेश्की शहर फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के पहले दिन से रूसी सेना के कब्जे में है। जून 2023 में काखोव्का बांध के टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ से इस शहर को भारी क्षति पहुंची थी। कभी करीब 24,000 की आबादी वाला यह शहर अब युद्ध की विभीषिका के कारण बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह वंचित हो चुका है। वर्तमान में यहां लगभग 1,700 से 2,000 नागरिक ही बचे हैं जो बेहद कठिन और संकटपूर्ण परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं。
समझौते की रूपरेखा के मुताबिक, युद्धविराम की शुरुआत को लेकर अलग-अलग तारीखों का जिक्र सामने आया है। यूक्रेनी मुख्य वार्ताकार Dmytro Lubinets के अनुसार यह स्थानीय युद्धविराम 27 अक्टूबर को शुरू होगा। वहीं, व्हाइट हाउस के हवाले से कुछ अन्य रिपोर्टों में इसकी शुरुआत 29 अक्टूबर को होने की बात कही गई है। इस विरोधाभास के बीच दोनों पक्षों ने जमीनी स्तर पर राहत कार्य शुरू करने की तैयारी कर ली है。
रूस के जनरल स्टाफ के प्रमुख जनरल वालेरी गेरासिमओव ने इस संबंध में बयान देते हुए कहा है कि रूसी सेना ओलेश्की के पास मानवीय अभियान के सिलसिले में खेरसॉन अक्ष पर गोलीबारी रोकेगी। रूसी सेना राहत काफिले की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए सैन्य कार्रवाई को अस्थायी तौर पर रोकेगी।
यूक्रेनी पक्ष की ओर से मुख्य वार्ताकार Dmytro Lubinets ने इस ऑपरेशन को बेहद चुनौतीपूर्ण करार दिया है। इस मानवीय गलियारे को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए सबसे पहले शहर के रास्तों और घरों के आसपास बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना होगा। इसके बिना राहत सामग्री का पहुंचना और नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना संभव नहीं है。
समझौते की शर्तों के तहत, युद्धविराम के दौरान गैर-सैन्य दल ओलेश्की में घर-घर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे। राहत दल वहां फंसे लोगों को भोजन और चिकित्सा सामग्री वितरित करेंगे। इसके साथ ही, जो नागरिक इस तबाही के बीच अपनी इच्छा से शहर छोड़कर जाना चाहते हैं, उनके लिए सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया है कि निकाले जाने वाले नागरिकों को रूस ले जाया जाएगा या यूक्रेन के नियंत्रित क्षेत्रों की तरफ भेजा जाएगा。
इस स्थानीय समझौते को युद्ध के मोर्चे पर फंसे बेसहारा और असहाय नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से बुनियादी जरूरतों से कटे इस शहर में मदद पहुंचने से मानवीय संकट का सामना कर रहे लोगों को फौरी सहारा मिलने की उम्मीद है।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों की सेनाएं जमीन पर इस मानवीय समझौते का किस हद तक पालन करती हैं। बारूदी सुरंगों को हटाने और सुरक्षित गलियारा तैयार करने की यह जटिल प्रक्रिया आने वाले दिनों में तय करेगी कि युद्ध के बीच इस तरह के स्थानीय समझौते कितने सफल साबित होते हैं。
खबर को सिर्फ पढ़िए नहीं, सवाल भी पूछिए।
किसी भी राजनीतिक खबर को समझने के लिए घटना के साथ उसका असर, संदर्भ और आगे होने वाले बदलावों पर भी नज़र रखना जरूरी है।
इस खबर को उपलब्ध रिपोर्टों और स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है।





