अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच एक नया रणनीतिक संकेत दिया है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा है कि वाशिंगटन तेहरान के पास स्थित भारी भरकम और सुरक्षित भूमिगत ठिकाने पिक्सएक्सी माउंटेन को निशाना बनाने की संभावना पर विचार कर रहा है। पिक्सएक्सी माउंटेन वह रणनीतिक पहाड़ी क्षेत्र है, जिसे लेकर वाशिंगटन और उसके सहयोगियों का मानना है कि वहां ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम हिस्से और उपकरण सुरक्षित रखे गए हैं। इस संभावित सैन्य कदम को लेकर अमेरिका के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध के स्वरूप को लेकर कुछ अहम सीमाएं भी तय की हैं। ट्रम्प ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें ईरान के भीतर जमीनी सैनिकों को उतारे जाने की बात कही जा रही थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह ईरान की जमीन पर थल सेना भेजने की कोई योजना नहीं देख रहे हैं। इसके साथ ही, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को भी उन्होंने पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका कहना था कि इस मोर्चे पर परमाणु बमों का उपयोग करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अमेरिकी सेना के पास पारंपरिक हथियारों के जरिए तेजी से कार्रवाई करने के विकल्प मौजूद हैं।
रक्षा हलकों और मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की चर्चा है कि अमेरिकी सेना ने पिक्सएक्सी माउंटेन जैसे भारी किलेबंद underground ठिकानों से निपटने के लिए पारंपरिक रूप से दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु विस्फोटकों में गिने जाने वाले 'एमओएबी' यानी मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट बम के इस्तेमाल की योजनाएं तैयार की हैं। लगभग 21,600 पाउंड वजनी इस भारी-भरकम पारंपरिक बम को बंकरों को भेदने में बेहद प्रभावी माना जाता है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रम्प की ओर से इस संभावित हथियार के इस्तेमाल पर सीधे मुहर नहीं लगाई गई है, लेकिन सैन्य रणनीतिकारों के बीच इन विकल्पों पर लगातार मंथन चल रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा यह सैन्य टकराव कई महीनों से लगातार जारी है। इस संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों की ओर से नौसैनिक नाकेबंदी, आर्थिक प्रतिबंध, हवाई हमले और जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों पर आवाजाही बाधित करने जैसी कार्रवाइयां देखने को मिली हैं। इस पूरे तनाव के बीच खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्गों पर तेल की आपूर्ति और वैश्विक व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे यूरोपीय देशों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव कम होने के कोई साफ संकेत नहीं दिख रहे हैं। हाल ही में तेहरान की ओर से सात दिन के संघर्ष विराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का जो प्रस्ताव रखा गया था, उसे अमेरिकी नेतृत्व ने अस्वीकार कर दिया था। इसके साथ ही, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने यवन में एक बैठक के दौरान साफ किया था कि उनका देश किसी भी तरह के दबाव के आगे नहीं झुकेगा और उनका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव को अनुचित करार देते हुए कहा कि ईरान अपने रुख से पीछे हटने वाला नहीं है।
इस लंबी लड़ाई का असर अब दुनिया के रक्षा भंडारों और रणनीतिक तैयारियों पर भी साफ दिखने लगा है। रक्षा विश्लेषकों और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इस युद्ध के दौरान पैट्रिअट और थाड जैसी मिसाइल रक्षा प्रणालियों के इंटरसेप्टर बड़ी संख्या में खर्च हुए हैं। भारी मांग और वैश्विक संघर्षों के चलते इन रक्षा भंडारों को अगले कुछ वर्षों तक सामान्य स्तर पर वापस लाने में लंबी अवधि लग सकती है, जिससे सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति को लेकर भविष्य की चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।
ईरान के भीतर की सैन्य स्थिति और उसकी क्षमताओं को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। अमेरिकी नेतृत्व का कहना है कि लगातार हमलों के बाद ईरान की नौसेना, वायु सेना और जमीनी ताकत काफी हद तक कमजोर हो चुकी है। इसके विपरीत, ईरानी सेना के प्रवक्ताओं का दावा है कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों और युद्धक क्षमताओं ने युद्ध से पहले के स्तर को भी पीछे छोड़ दिया है। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच जमीनी हकीकत यही है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।
आने वाले दिनों में इस बात पर पूरी नजर रहेगी कि क्या वाशिंगटन वास्तव में पिक्सएक्सी माउंटेन पर किसी बड़े हवाई हमले का आदेश देता है या नहीं। इसके साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नौसैनिक पाबंदियों और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी प्रशासन के सामने एक तरफ परमाणु कार्यक्रमों को रोकने की सामरिक चुनौती है, तो दूसरी तरफ लंबे खिंचते इस संघर्ष से निपटने के लिए अपने रक्षा भंडारों को संतुलित रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी है।
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