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राजनीतिक शतरंज• ARTICLE #796• 29 अक्टूबर 2026 को 10:28 pm बजे

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 'सार्वजनिक महाभियोग' की तैयारी, कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर होगा आयोजन

विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 30 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे के आवास पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है।

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मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की तैयारी

विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मामलों को लेकर विपक्ष ने आक्रामक रुख अख्तियार किया है। इसी क्रम में 30 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे के नई दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर एक विशेष कार्यक्रम निर्धारित किया गया है, जिसे 'सार्वजनिक महाभियोग' और मॉक संसद का रूप दिया गया है।

इस राजनीतिक आयोजन की रूपरेखा के संबंध में विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार द्वारा की जाएगी। वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खर्गे इस महाभियोग का प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी कार्यक्रम के अंत में समापन वक्तव्य देंगे। विपक्षी गठबंधन के अनुसार, इस कार्यवाही में प्रत्येक राजनीतिक दल से एक प्रतिनिधि को अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा, जिसमें समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत अन्य घटक दलों के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है।

इस आयोजन को लेकर राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि विपक्ष ने संसद की कार्यवाही के अनुरूप यह मंच तो तैयार किया है, किंतु इसमें संसद की गरिमा के प्रतिकूल किसी भी सामग्री से परहेज करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या सत्ता पक्ष की बेंचों के प्रतीकात्मक पुतले, पोस्टर अथवा आपत्तिजनक बैनर इस कार्यक्रम में प्रयोग नहीं किए जाएंगे। विपक्षी नेताओं का कथन है कि उनका विरोध चुनावी लोकतंत्र की नींव को कथित रूप से कमजोर किए जाने और मतदाता सूची में अनियमितताओं के विरुद्ध है।

कार्यक्रम के स्थल को लेकर भी आरंभ में गतिरोध उत्पन्न हुआ था। कांग्रेस नेताओं ने यह अभियोग लगाया कि प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के कारण उन्हें अशोक होटल या अन्य निर्धारित सार्वजनिक स्थलों पर इस आयोजन की अनुमति प्रदान नहीं की गई। इसके फलस्वरूप वैकल्पिक व्यवस्था के अंतर्गत इस संपूर्ण कार्यक्रम को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे के आवास पर स्थानांतरित करना पड़ा, जहां अब इसकी सभी प्रबंधकीय तैयारियां पूर्ण की जा रही हैं।

सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश तथा अन्य नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर संविधान की भावना का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष और एनडीए के सहयोगियों ने इस समस्त घटनाक्रम को लेकर विपक्ष पर तीखा प्रहार किया है। जनता दल (यूनाइटेड) और अन्य दलों के प्रवक्ताओं ने इस 'सार्वजनिक महाभियोग' तथा मॉक संसद के आयोजन को संसद और न्यायपालिका का प्रत्यक्ष अनादर बताया है। सत्ता पक्ष का मत है कि यह कदम केवल विपक्ष की हताशा और आगामी राजनीतिक पराजय से उपजी बौखलाहट को उजागर करता है।

यह संपूर्ण प्रतीकात्मक आयोजन 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित विशाल 'चलो दिल्ली' मेगा रैली से ठीक पूर्व संपन्न हो रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश प्रसारित कर देश के नागरिकों और छात्र समूहों से इस आंदोलन में भारी संख्या में सहभागिता का आह्वान किया है। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि नागरिकों को किसी भी प्रकार के पुलिस दबाव या अवरोध की परवाह किए बिना संविधान तथा राष्ट्र की रक्षा के लिए अग्रसर होना चाहिए।

प्रियंका गांधी वाड्रा इस समस्त 'सार्वजनिक महाभियोग' की सूक्ष्म व्यवस्थाओं और बैठकों का निरंतर पर्यवेक्षण कर रही हैं। विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने खर्गे के आवास पर संपन्न बैठकों में संपूर्ण रणनीति को संहिताबद्ध किया है, जिससे आगामी मेगा रैली के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित किया जा सके। एक ओर जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का संघर्ष करार दे रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे स्वतंत्र संस्थाओं पर दबाव सृजित करने का राजनीतिक हथकंडा मान रहा है।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि देश में निर्वाचन आयोग जैसी स्वायत्त संवैधानिक संस्था और प्रमुख विपक्षी दलों के मध्य का यह गतिरोध अब सड़क और बैठकों से आगे बढ़कर प्रत्यक्ष राजनीतिक मोर्चे पर आ चुका है। 30 अक्टूबर के इस प्रतीकात्मक महाभियोग के पश्चात 1 नवंबर को रामलीला मैदान की रैली यह निर्धारित करेगी कि विपक्ष इस प्रकरण को जनसामान्य के मध्य कितनी गहराई तक प्रेषित करने में सफल होता है। वर्तमान में दोनों पक्षों की ओर से सियासी बयानबाजी तीव्र है और राजनीतिक पारा अपने चरम पर है।

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