केरल विधानसभा ने निवेश प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी देने के लिए 'SARAL' (Simplified & Accelerated Regulatory Approvals and Licensing) Keralam Bill, 2026 को पारित कर दिया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य राज्य में औद्योगिक उद्यमों के लिए जरूरी लाइसेंस और परमिट तय समय पर जारी करना है, जिससे निवेशकों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
इस बिल को सदन में पेश करने से पहले जांच के लिए विषय समिति के पास भेजा गया था। समिति के पास जाने के बाद इस पर विधायकों की ओर से 1,800 से अधिक संशोधन लाए गए, जिनमें से कुछ अहम संशोधनों को बिल में शामिल किया गया। इसके बाद इसे सदन में बहुमत के साथ पारित कर दिया गया, जहां केवल दो सदस्यों ने इसका विरोध किया।
राज्य सरकार का तर्क है कि जैसे-जैसे केरल निवेश के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है, वैसे-वैसे रास्ते की बाधाओं को दूर करना और समय पर मंजूरियां देना बेहद जरूरी हो गया है। सरकार के मुताबिक इस व्यवस्था के जरिए 'One-State-One-Approval-One-Document' यानी ओएसएडी की अवधारणा पर काम होगा, जिससे निवेशकों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान विपक्ष और कुछ विधायकों की तरफ से कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। चर्चा के दौरान माकपा विधायक के.वी. सुमेेश ने पॉइंट ऑफ़ ऑर्डर उठाते हुए आशंका जताई थी कि यह नया कानून पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कड़े प्रावधानों और कानूनों को कमजोर कर सकता है।
विधायक की तरफ से यह भी सवाल उठाया गया था कि क्या यह नया सिस्टम साल 2025 में बनाए गए सिंगल विंडो मैकेनिज्म के समानांतर कोई दूसरी व्यवस्था खड़ा कर देगा और क्या इससे स्थानीय निकायों के अधिकारों पर कोई असर पड़ेगा।
इन तमाम सवालों और आशंकाओं पर सरकार की ओर से स्पष्टीकरण भी सामने आया है। उद्योग मंत्री पी.के. कुंजुहलिकुट्टी ने सदन में साफ किया कि किसी भी मौजूदा कानून को दरकिनार नहीं किया जा रहा है। उनके मुताबिक, निवेशकों के आवेदन विभिन्न स्तरों पर तय कानूनों के तहत पूरी जांच के बाद ही अंतिम प्राधिकरण के पास पहुंचेंगे।
माकपा नेता साजी चेरियन ने भी इस पर पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी निवेश को बढ़ावा देने वाले सभी सकारात्मक और पारदर्शी प्रयासों का समर्थन करती है, बशर्ते नियमों का पालन सही तरीके से हो।
इस नए कानून के लागू होने के बाद अब निवेशकों के लिए राज्य में काम शुरू करना आसान होने की उम्मीद है। हालांकि, व्यावहारिक स्तर पर यह देखना अहम होगा कि सिंगल स्टेट अथॉरिटी के गठन के बाद स्थानीय निकायों और पर्यावरण से जुड़े नियमों के साथ इसका तालमेल कैसा रहता है。
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