शारीरिक बनावट के शुरुआती आकलन में इनके Sumatran orangutan होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, यह निष्कर्ष अभी अंतिम नहीं है। DNA और genetic testing से species तथा भौगोलिक origin की पुष्टि की जानी है। जानवरों के acclimatise होने के बाद samples लिए जाने की तैयारी है।

इंडोनेशिया के Forestry Ministry ने भारतीय अधिकारियों और भारत की CITES Management Authority के साथ संपर्क किया है। मंत्रालय health examination, quarantine, genetic identification, transport और rehabilitation से जुड़ी technical requirements तैयार कर रहा है। इसका मतलब यह है कि Jakarta संभावित वापसी के लिए groundwork कर रहा है—लेकिन पांचों को Indonesia भेजने की अंतिम मंजूरी अभी नहीं हुई है।

ओडिशा में STF और Wildlife Crime Control Bureau यह पता लगाने में जुटे हैं कि जानवर भारत और फिर बालासोर तक कैसे पहुंचे। जांच में CCTV footage, mobile और tower data, संभावित vehicle movement तथा यह संभावना भी देखी जा रही है कि कहीं किसी भारतीय zoo से जानवर चोरी तो नहीं हुए। संभावित road route या किसी international network की भूमिका फिलहाल जांच का हिस्सा है, स्थापित तथ्य नहीं।

यह मामला सिर्फ वन्यजीव बचाव तक सीमित नहीं है। ऑरंगुटान CITES Appendix I में सूचीबद्ध हैं, इसलिए इनके international commercial trade पर बेहद कड़े नियम लागू होते हैं। किसी भी cross-border transfer के लिए origin documents, permits, संबंधित प्राधिकरणों की मंजूरी और कानूनी प्रक्रिया निर्णायक होगी।

अगर repatriation आगे बढ़ती है, तो इसका अर्थ सीधे जंगल में छोड़ना नहीं होगा। पहले medical clearance, quarantine, genetic पहचान, behavioural assessment और rehabilitation की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। फिलहाल असली राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल यही है कि DNA जांच और भारतीय जांच किस दिशा में जाती है—क्योंकि उसी के आधार पर custody, कानूनी कार्रवाई और संभावित वापसी का अगला कदम तय होगा।