भारतीय सशस्त्र बलों ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए बेंगलुरु की जनरेटिव एआई कंपनी सर्वम एआई के साथ हाथ मिलाया है। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (HQ IDS) ने इस कंपनी के साथ पांच साल के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए सुरक्षित, संप्रभु और मापनीय एआई एप्लिकेशन तैयार करना है, जिससे विदेशी प्रौद्योगिकी पर देश की निर्भरता को कम किया जा सके।
इस पांच साल के समझौते के तहत तीनों सेनाओं और संयुक्त संगठनों को एक सामान्य फाउंडेशन मॉडल, एजेंटिक बुनियादी ढांचे और भू-स्थानिक प्रणालियों तक पहुंच मिलेगी। इसके जरिए रक्षा कार्यों को अधिक सटीक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की योजना है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद भारतीय सैन्य प्रणालियों में डेटा संप्रभुता को मजबूत करना और देश के भीतर ही संवेदनशील सैन्य अनुप्रयोगों के लिए एआई प्रणालियों को विकसित करना है।
इस विशेष कार्य के लिए सर्वम एआई के भीतर 'चाणक्य' नाम से एक अलग और पूरी तरह सुरक्षित फायरवॉल्ड डिवीजन बनाई गई है, जो विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करेगी। इस परियोजना में सर्वम के अपने फाउंडेशन मॉडल जैसे 'सर्वम 105B' का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से सेना को परिचालन, प्रशिक्षण और निर्णय-समर्थन जैसे क्षेत्रों में मदद मिलेगी।
समझौते के दायरे में कई तकनीकी और सामरिक पहलू शामिल हैं। इसके तहत मुख्य रूप से निर्णय-समर्थन, लक्ष्य प्राप्ति और डेटा संलयन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर काम किया जाएगा। एक सेवा की परियोजनाओं से मिलने वाले सबक और अनुभव अन्य सेनाओं के काम को भी बेहतर बनाने में मदद करेंगे, जिससे पूरे रक्षा तंत्र में तालमेल बेहतर होगा।
इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर सर्वम एआई के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने कहा है कि उनकी कंपनी भारत में और भारत के लिए एआई बनाने के उद्देश्य से काम कर रही है। उनके इस मिशन का मूल उद्देश्य देश की अपनी बुद्धिमत्ता को उन तकनीकी प्रणालियों में शामिल करना है, जिन पर देश अपनी सुरक्षा के लिए निर्भर करता है।
इस समझौते में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि तकनीकी सहायता मिलने के बावजूद परिचालन निर्णयों पर मानवीय नियंत्रण पूरी तरह से बना रहेगा। यानी अंतिम फैसले हमेशा इंसानी सूझबूझ और सैन्य अधिकारियों के हाथ में ही होंगे। हालांकि इस पांच साल के समझौते के वित्तीय मूल्य और व्यक्तिगत परियोजनाओं के सटीक विवरण को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह पहल सरकार की 'आत्मनिर्णय' और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नीति का एक अहम हिस्सा है। इस समझौते के साथ ही भारतीय सेनाएं अब आधुनिक युद्ध और रणनीतिक जरूरतों के लिए देश में ही तैयार की गई तकनीकों का दायरा बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
खबर को सिर्फ पढ़िए नहीं, सवाल भी पूछिए।
किसी भी राजनीतिक खबर को समझने के लिए घटना के साथ उसका असर, संदर्भ और आगे होने वाले बदलावों पर भी नज़र रखना जरूरी है।
इस खबर को उपलब्ध रिपोर्टों और स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है।





